शनिवार, २ फेब्रुवारी, २०१३

तुझ्या विरहात रे .......!




घन निळे झाले मन 

तुझ्या विरहात रे .......!
भरुनी हृदय गच्च झाले 
गंध श्वासात रे.......!
    
     भान सुटले मनाचे 
     कळा लागल्या जीवा 
     पाहता नभात रे......!

दाटुनी नभात जेव्हा 
घन व्याकुळ रडले 
साद माझीच ती 
एक तू...
आक्रोश धारांत रे ....!!!


                                  समिधा 

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